The Maheshwaris live their lives on the principles of Maheshwaritva which were formed at the time of the origin of Maheshwari community. And the festival of Mahesh Navami is the main basis of Maheshwaritva (Maheshwarism). Maheshacharya is Patron of Maheshwari culture / Maheshwaritva. Maheshacharya, this is the supreme guru post/position of Maheshwaris. Presently Yogi Premsukhanand Maheshwari (Peethadhipati, Maheshwari Akhada) is the Maheshacharya.
To put the religious symbol of Maheshwari Samaj and Maheshwari identity mark on your bike, two-wheeler or four wheeler vehicle, please click on this link to download the symbol> माहेश्वरी सिम्बॉल्स (Maheshwari symbols)
अपनी bike, two-wheeler या four wheeler वाहन पर माहेश्वरी समाज के धार्मिक प्रतीक-चिह्न और माहेश्वरी पहचान चिह्न को लगाने हेतु, सिम्बॉल को Download करने के लिए कृपया इस link पर click कीजिये > माहेश्वरी सिम्बॉल्स (Maheshwari symbols)
WhatsApp, Facebook andTwitter have now become the most popular forum where many people are connected to each other. Almost every user shares their feelings and expressions with their friends by updating the status and images. Now Twitter profile pictures,WhatsApp DP and Facebook DP,Profile Pictures,Pic, photo, have also become the latest way of expressing their emotions to our friends. Now, coming to the point. Dear Maheshwari Brothers and Sisters, are you searching for Best Mahesh Navami theme and Maheshwari theme WhatsApp DP or Facebook Profile Pic? If yes, then keep reading the post.
Dear Maheshwari brothers and sisters, yeah, We know that there are so many Maheshwari WhatsApp, Facebook and Twitter users are searching for Mahesh Navami theme and Maheshwari theme WhatsApp DP and Facebook Profile Pics. We have shared some special collection of Maheshwari theme Profile Pictures, Facebook DP and WhatsApp DP for you. This All the Photos are in HD and High Quality. You can easily download the photos shared below and make it as your profile picture or DP for WhatsApp, Facebook or Twitter.
Jay Mahesh !
व्हाट्सएप और फेसबुक और ट्विटर अब सबसे लोकप्रिय मंच बन गया है जहां बहुत से लोग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. लगभग हर उपयोगकर्ता समय समयपर अपनी भावनाओं और अभिव्यक्ति को अपने दोस्तों के साथ स्थिति और फोटो/इमेज को अपडेट करके साझा करता है. अब व्हाट्सएप डीपी और फेसबुक प्रोफाइल पिक्चर्स भी हमारे दोस्तों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का एक नवीनतम तरीका बन गया हैं.
अब, मुख्य विषय पर आ रहे है. क्या आप बेस्ट महेश नवमी थीम और माहेश्वरी थीम व्हाट्सएप डीपी या फेसबुक प्रोफाइल फोटो खोज रहे हैं? यदि हां, तो पोस्ट को पढ़ते रहें. हाँ, हमें पता है कि माहेश्वरी व्हाट्सएप और फेसबुक उपयोगकर्ता महेश नवमी थीम और माहेश्वरी थीम व्हाट्सएप डीपी और फेसबुक प्रोफाइल पिक्चर्स की तलाश में हैं. हमने आपके लिए महेश नवमी थीम और माहेश्वरी थीम प्रोफाइल पिक्चर्स और व्हाट्सएप डीपी के कुछ विशेष संग्रह साझा किए हैं. यह सभी तस्वीरें एचडी और उच्च गुणवत्ता में हैं. आप नीचे साझा की गई तस्वीरों को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं और इसे व्हाट्सएप, फेसबुक या ट्विटर के लिए अपनी प्रोफ़ाइल तस्वीर या डीपी के रूप में बना सकते हैं.
What should be the process of formation of Mahesh Navami Utsav Samiti, how should the Utsav Samiti be formed. Why is Mahesh Navami celebrated and what is its significance for the Maheshwari community? What is Mahesh Navami? Why Mahesh Navami called Maheshwari Utpatti or Vanshotpatti Diwas. If you don't know these things clearly but want to know them, then this article will be essential for you to read. Why? You'll definitely find out the answer by the end of the article.
Hindi:महेश नवमी उत्सव समिति के गठन की प्रक्रिया कैसी होनी चाहिए, उत्सव समिति का गठन कैसे किया जाना चाहिए. महेश नवमी क्यों मनाई जाती है और Maheshwari Samaj के लिए क्या है इसका महत्व? महेश नवमी क्या है? महेश नवमी को क्यों"माहेश्वरीउत्पत्ति यावंशोत्पत्ति दिवस"कहा जाता है? यदि आप इन बातों को ठीक से नहीं जानते है लेकिन इसे जानना चाहते है तब यह आर्टिकल/लेख आपके लिए पढना काफी जरुरी होगा. क्यूँ? इसका जवाब आपको आर्टिकल के अंत तक जरुर से मालूम पड़ जायेगा.
By, Maheshacharya Premsukhanand Maheshwari Maharaj (Peethadhipati - Maheshwari Ahada): Mahesh Navami is the origin day (emergence day or foundation day) of the Maheshwari community and the Maheshwari dynasty, that is why the festival of Mahesh Navami is associated with the existence of the Maheshwari community and the unique identity of the Maheshwari community. And that is why, along with celebrating Mahesh Navami publicly, it should also be celebrated in every Maheshwari home. This is extremely necessary to maintain the Maheshwari culture, the existence of Maheshwari community and theunique identity of Maheshwari community.
द्वारा, महेशाचार्य प्रेमसुखानन्द माहेश्वरी (पीठाधिपति माहेश्वरी अखाड़ा): महेश नवमी माहेश्वरी समाज और माहेश्वरी वंश का उत्पत्ति दिवस (उद्भव दिवस या स्थापना दिवस) है, इसीलिए महेश नवमी का त्यौहार माहेश्वरी समाज के अस्तित्व और माहेश्वरी समाज की विशिष्ट पहचान से जुड़ा है. और इसीलिए महेश नवमी को सार्वजनिक रूप से मनाने के साथ-साथ प्रत्येक माहेश्वरी घर में भी मनाया जाना चाहिए. माहेश्वरी संस्कृति, माहेश्वरी समाज का अस्तित्व और माहेश्वरी समाज की विशिष्ठ पहचान को बनाये रखने के लिए ये अत्यंत आवश्यक है.
Mahesh Navami, biggest festival of Maheshwari community —
महेश नवमी का पर्व ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान महेश (भगवान शिव) के वरदान और देवी महेश्वरी (पार्वती) के आशीर्वाद से माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई, जिसे माहेश्वरी समाज माहेश्वरी वंशोत्पत्ति कहता है. माहेश्वरी मान्यता के अनुसार 3133 ईसा पूर्व में इसी दिन एक नए वंश की, माहेश्वरी वंश की शुरुवात हुई (इस दिन को माहेश्वरी समाज का स्थापना दिवस भी कहा जा सकता है), तभी से माहेश्वरी समाज माहेश्वरी वंशोत्पत्ति दिवस को महेश नवमी के नाम से मनाता आया है, मना रहा है. इसलिए माहेश्वरीयों के हर एक घर-परिवार में इस दिन भगवान महेश जी की पूजा का विधान है. इतना ही नहीं, समाज के विभिन्न संगठनों की ओरसे इस दिन "महेश नवमी" को सार्वजनिक रूप से भी मनाया जाता है, शोभायात्रा निकाली जाती है, भगवान महेश जी की महा आरती की जाती है, तथा इस अवसर पर समाजहित, जनहित एवं देशहित के अनेको कार्यक्रमों को आयोजित किया जाता है. महेश नवमी का यह त्योंहार माहेश्वरीयों और माहेश्वरी समाज के अस्तित्व और पहचान से जुड़ा हुवा त्योंहार है इसलिए महेश नवमी माहेश्वरीयों का सबसे बड़ा त्योंहार है, सबसे बड़ा पर्व है. परंपरागत मान्यता के अनुसार महेश नवमी के दिन भगवान महेश जी की विधि विधान से पूजा करने से सुख, समृद्धि, धन, वैभव तथा यश और कीर्ति की प्राप्ति होती है.
महेश नवमी पर्व मनाया जाये समस्त माहेश्वरी समाज के संयुक्त भागीदारी से...
समाजबंधुओं, माताओ और बहनो, जैसा की हम सब जानते है की माहेश्वरी समाज अपने वंशोत्पत्ति दिवस को "महेश नवमी" के नाम से समाज के सबसे बड़े पर्व, सबसे बड़े त्योंहार के रूप में मनाता है. महेश नवमी का यह पर्व किसी एक माहेश्वरी संगठन का कार्यक्रम (प्रोजेक्ट) नहीं है बल्कि समस्त माहेश्वरी समाज का पावन पर्व है इसलिए महेश नवमी का उत्सव हरएक माहेश्वरी परिवार और हरएक माहेश्वरी संगठन की संयुक्त भागीदारी से मनाया जाना चाहिए. इस पावन पर्व को मनाने के लिए हरएक शहर स्तर पर "सार्वजनिक महेश नवमी उत्सव समिति" बनाकर इस समिति के मार्गदर्शन और नेतृत्व में महेश नवमी उत्सव के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए.
"सार्वजनिक महेश नवमी उत्सव समिति" की रूपरेखा —
अपने-अपने शहर में माहेश्वरी समाज के लिए कार्य करनेवाले जितने भी सामाजिक संगठन है (युवा मंच, युवा संगठन, प्रगति मंडल, महिला मंडल, युवती मंडल, बहु मंडल, युवा संगठन, महासभा का शहर संगठन, माहेश्वरीज क्लब, महेश सेवा संघ, महेश परिवार आदि जितने भी माहेश्वरी सामाजिक संगठन है) इन सभी संगठनों के अध्यक्ष और सचिव को लेकर (शामिल कर के) प्रतिवर्ष, 'सार्वजनिक महेश नवमी उत्सव समिति' का गठन किया जाये. यह समिति महेश नवमी उत्सव के आयोजक के रूप में कार्यक्रम की रुपरेखा बनाकर इस पर्व पर होनेवाले कार्यक्रम का संचालन करें. इससे एक तो "सार्वजनिक महेश नवमी उत्सव" अपने-अपने शहर के जितने भी माहेश्वरी संगठन, मंडल है उन सभी के संयुक्त/सामूहिक नेतृत्व में मनाया जायेगा. दूसरी बात इससे महेश नवमी के सार्वजनिक आयोजन के नेतृत्व करने में ज्येष्ठ माहेश्वरी समाजजन, युवा वर्ग, महिलाएं, माता-बहने, बहुएं इन सभी को प्रतिनिधित्व मिलेगा जिससे महेश नवमी उत्सव में समाज के इन सभी वर्गों की सहभागिता बढ़ेगी. तीसरी बात, ज्येष्ठ माहेश्वरी समाजजन, युवा वर्ग, महिलाएं, माता-बहने, बहुएं इनका आपसी संपर्क और संवाद बढ़ेगा, इन सभी को कार्यक्रमों की भिन्न भिन्न जिम्मेदारियाँ मिलने से सामाजिक कार्य में जिम्मेदारियाँ निभाने का अवसर और अनुभव मिलेगा; इससे समाज के भविष्य के नेता और कुशल नेतृत्व तैयार होगा. समाज का नेतृत्व अगली पीढ़ी के सुरक्षित और कर्तृत्ववान हाथों में देने की एक सिस्टिम, एक व्यवस्था तैयार होगी. समाज को बेहतर भविष्य मिल सकें, भविष्य में समाज का नेतृत्व सुरक्षित और कर्तत्वशाली हाथों में रहे इसलिए हमें विशेष रूप से ध्यान देकर ऐसी एक सिस्टिम बनाने के लिए महेश नवमी उत्सव के अवसर का लाभ जरूर उठाना चाहिए.
महेश नवमी ज्येष्ठ शुक्ल नवमी तिथि को मनाई जाती है, ईसवी सन पूर्व 3133 में इसी तिथि को स्वयं भगवान महेशजी और देवी पार्वती ने माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति/स्थापना की थी और माहेश्वरी समाज अस्तित्व में आया था. माहेश्वरी समाज के अस्तित्व में आने के साथ ही माहेश्वरी संस्कृति भी अस्तित्व में आयी जिसे माहेश्वरीत्व (English: Maheshwarism) कहा जाता है. माहेश्वरी समाज के उदय के साथ ही माहेश्वरीत्व (Maheshwarism) का उदय हुवा. इसलिए महेश नवमी माहेश्वरीत्व और माहेश्वरी समाज के अस्तित्व से जुड़ा हुवा त्योंहार है, माहेश्वरी समाज की "माहेश्वरी" इस विशिष्ठ पहचान से जुड़ा हुवा त्योंहार है. महेश नवमी का त्योंहार मनाना अर्थात अपने माहेश्वरी समाज के अस्तित्व को कायम रखना है, अपनी विशिष्ठ पहचान को कायम रखना है, अपनी गौरवपूर्ण संस्कृति और विरासत का संरक्षण और संवर्धन करना है.
महेश नवमी के कार्यक्रमों के आयोजन में माहेश्वरी संगठनों के पदाधिकारियों को, समाज के बुद्धिजीवियों को; माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति कैसे हुई थी? क्यों हुई थी? माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति होने की इस गौरवपूर्ण घटना के समय और क्या क्या चीजें हुई थी, क्या क्या बातें हुई थी? उनका मतलब क्या था? इससे माहेश्वरी संस्कृति कैसे विकसित हुई? ईसवी सन पूर्व 3133 में घटित हुई माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति के घटना से जुडी वह कौन कौनसी परम्पराएं है, जिसे माहेश्वरी समाज और माहेश्वरी समाज के लोग आज भी निभाते है... इसी जानकारी में माहेश्वरी समाज के प्रगति का, समृद्धि का, बरकत का, समाज और समाज के लोगों को दुनिया में मिलनेवाले आदर और मान-सम्मान का, माहेश्वरी समाज के लोगों की जीवनशैली (Lifestyle) का फार्मूला/राज़ (Secret) छुपा हुवा है. इन सभी बातों की एक एक डिटेल्स से समाज के लोगों को और खास कर के नई पीढ़ी को बताने की जरुरत है.माहेश्वरी समाज के लिए निकलनेवाली न्यूज़ पत्रिकायें भी इसमें कारगर भूमिका निभा सकती है. तभी महेश नवमी का त्योंहार मनाने की सार्थकता है. वर्ना तो ऐसे होगा की विवाह के कार्यक्रम में मंडप, स्टेज, बैंडबाजा, भोजन-व्यवस्था, पंडितजी और लोगबाग सब है लेकिन ना विवाह किसका है ये पता है और ना दूल्हा-दुल्हन है तो विवाह का या विवाह में शामिल होने का क्या मतलब है. कहने का तात्पर्य यह है की महेश नवमी के कार्यक्रमों में विशेष रूप से, ध्यान देकर माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति की घटना और उत्पत्ति के बाद से अबतक के संक्षिप्त इतिहास के बारे में परिपूर्ण जानकारी समाजजनों को देने का कार्य किया जाना चाहिए.
महेश नवमी के कार्यक्रम के लिए "सार्वजनिक महेश नवमी उत्सव समिति" के कार्यकर्ता-पदाधिकारी समाज के हरएक घर-परिवार पर जाकर उनसे राजीखुशी से दिया जानेवाला आर्थिक योगदान (दानराशि) जमा करें, उन्हें ससम्मान महेश नवमी कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करें. कार्यक्रम का खर्च किसी एक व्यक्ति या कुछ गिने चुने व्यक्ति या परिवार द्वारा ना करें बल्कि प्रतिवर्ष हरएक माहेश्वरी घर-परिवार से दानराशि जमा करके ही महेश नवमी का उत्सव और कार्यक्रम मनाया जाये. महेश नवमी के दिन समाजभोज (समाज के सामूहिक भोजन) का आयोजन ना किया जाये बल्कि अपने-अपने घर पर मिष्टान्न बनाकर दोपहर में महेश-पार्वतीजी को भोग लगाकर प्रसादी ग्रहण करें. महेश नवमी के कार्यक्रम पत्रिका, मुख्य बैनर (banner), शोभायात्रा में किसी एक संगठन के सिम्बॉल का नहीं बल्कि माहेश्वरी समाज के धार्मिक निशान/प्रतिक चिन्ह (Symbol) "मोड़" और समाज के ध्वज "दिव्यध्वज" का प्रयोग (use) किया जाये. महेश नवमी के शोभायात्रा आदि कार्यक्रमों के माध्यम से समाज की संस्कृति, समाज की विरासत, समाज के गौरवचिन्हों और समाज की विशिष्ठ पहचान को कायम रखने तथा उनके संरक्षण-संवर्धन का कार्य किया जाये.
हर घर-परिवार में भी मनाया जाये 'महेश नवमी उत्सव' —
अपने अपने शहर में समाज द्वारा महेश नवमी का भव्य 'सार्वजनिक महेश नवमी उत्सव कार्यक्रम' तो किया जाता है लेकिन हरएक माहेश्वरी घर-परिवार में भी महेश नवमी उत्सव मनाया जाना चाहिए. माता-बहनों से बिनम्र अनुरोध है की महेश नवमी के दिन दोपहर में अपने-अपने घर पर माहेश्वरी समाज के उत्पत्तिकर्ता, हमारे समाज के इष्टदेव भगवान महेशजी तथा महेश परिवार की सपरिवार पूजा-अर्चना करें, उन्हें भोग बताएं और आरती करें. इस दिन शिव-चालीसा, महेश मानस पूजा, महेशाष्टक का पाठ करें. पंचनमस्कार महामंत्र तथा महेशजी का अष्टाक्षर मंत्र "ॐ नमो महेश्वराय" का जाप करें. अपने परिवार के सुख-समृद्धि के लिए महेशजी-माता पार्वती-गणेशजी से प्रार्थना करें.
बिनम्र अनुरोध —
महेश नवमी के पावन पर्व पर "सार्वजनिक महेश नवमी उत्सव समिति" द्वारा आयोजित शोभायात्रा आदि कार्यक्रमों में सभी समाजबंधु, माता-बहनें, बच्चे-युवा-बुजुर्ग, परिवार का हरएक सदस्य हर्ष-उल्हास के साथ उपस्थित रहे. महेश नवमी उत्सव समिति द्वारा आयोजित महेश नवमी के मुख्य कार्यक्रम के अलावा अलग-अलग माहेश्वरी संगठन अपने-अपने संगठन की ओरसे समाजहितकारी कार्यक्रमों (जैसे की- जेष्ठ समाजबंधुओं/बुजुर्गों का सत्कार, स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर आदि...) का आयोजन करें; राष्ट्रसेवा के कार्य... जैसे की स्वच्छता अभियान, वृक्षावरोपण, रक्तदान शिविर जैसे कार्यक्रम लिए जाये.
*लेख (आर्टिकल) साभार - महेशाचार्य प्रेमसुखानन्द माहेश्वरी महाराज
माहेश्वरी वंश चिरायु होवो! समस्त माहेश्वरीजनों को माहेश्वरी वंशोत्पत्ति दिवस "महेश नवमी" की हार्दिक शुभकामनाएं... भगवान महेशजी और देवी महेश्वरी की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे यही मंगलकामनाएं!!!